जनसेवा और समर्पण की मिसाल: बांदा के दिलों पर राज करने वाले जननायक

    जनसेवा और समर्पण की मिसाल: बांदा के दिलों पर राज करने वाले जननायक श्याम मोहन धुरिया 

ब्यूरो सुरेंद्र धुरिया अज़रा न्यूज़ बांदा। राजनीति में पद और प्रतिष्ठा पाना आसान हो सकता है, लेकिन जनता के दिलों में निःस्वार्थ सेवा के दम पर जगह बनाना हर किसी के बस की बात नहीं है। जनपद में जब भी सादगी, धार्मिक निष्ठा और बेबाक जनसेवा की बात आती है, तो एक ही नाम आम और खास की जुबां पर सबसे पहले आता है – श्याम मोहन धुरिया। mभारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और जिले के प्रमुख समाजसेवी के रूप में विख्यात श्याम मोहन धुरिया आज बांदा के हर पीड़ित, गरीब और जरूरतमंद की मजबूत ढाल बन चुके हैं।

जब सूरज आग उगलता है और भीषण गर्मी में पानी की एक-एक बूंद के लिए हाहाकार मचता है, उस समय श्याम मोहन धुरिया प्रशासनिक दावों के भरोसे नहीं बैठते। वे स्वयं आगे आकर अपने निजी संसाधनों से बस्तियों में पानी के टैंकर लगवाते हैं। उनका संकल्प रहता है कि किसी भी निर्धन परिवार का चूल्हा पानी की कमी से ठंडा न पड़े और मासूम बच्चों की पढ़ाई पानी ढोने के चक्कर में प्रभावित न हो। तपती धूप में जब लोग घरों से निकलने से कतराते हैं, तब श्याम मोहन धुरिया खुद बस्तियों में खड़े होकर पानी बंटवाते नजर आते हैं। उनकी सबसे बड़ी पहचान उनकी सहज सुलभता है। उनके दरवाजे से कोई भी व्यक्ति खाली हाथ या भूखा नहीं लौटता। आधी रात को भी यदि किसी असहाय का फोन आता है, तो वे बिना देर किए मदद के लिए मौके पर पहुंच जाते हैं। चाहे थाना हो, अस्पताल हो या पारिवारिक समस्या, वे हमेशा एक अभिभावक और भाई की तरह खड़े मिलते हैं। सालों की निःस्वार्थ सेवा, भक्ति भाव और धार्मिक आयोजनों में सक्रिय सहभागिता ने उन्हें बांदा का सबसे चहेता चेहरा बना दिया है। जनता के बीच उनका जनाधार इतना मजबूत है कि लोग उन्हें जननायक के रूप में देखते हैं। बांदा की जनता ने दशकों से ऐसे कई चेहरे देखे हैं जो चुनाव में बड़े-बड़े वादे कर सत्ता में आए और फिर किनारा कर लिया। ऐसे दौर में श्याम मोहन धुरिया का नेतृत्व बांदा जनपद के लिए सौभाग्य से कम नहीं है। वे उन चंद नेताओं में से हैं जो राजनीति को व्यवसाय नहीं, बल्कि ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ का माध्यम मानते हैं। जिले के प्रबुद्ध नागरिकों और आम जनता का मानना है कि बांदा को विकास के शिखर पर ले जाने और हर वर्ग को न्याय दिलाने के लिए श्याम मोहन धुरिया जैसे समर्पित, ईमानदार और कर्मठ नेतृत्व की ही जरूरत है। जनता का यह स्नेह और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

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