150 गांवों में अंधेरा, धान की फसल पर संकट
– 33 केवी लाइन फेल होने से 13 हजार उपभोक्ता बेहाल
मो. ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज़ फतेहपुर। 33/11 केवी असोथर विद्युत उपकेंद्र से संचालित छह फीडरों की बिजली आपूर्ति शनिवार से लगातार बाधित रहने के कारण करीब 150 गांवों के लगभग 13 हजार उपभोक्ता भारी परेशानी झेल रहे हैं। बिजली संकट के चलते क्षेत्र के करीब 50 छोटे-बड़े कारखाने बंद पड़े हैं, जबकि लगभग एक हजार निजी नलकूप ठप होने से धान की फसल पर सिंचाई का संकट गहरा गया है। कई दिनों से बारिश नहीं होने के कारण किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
प्रदेश सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन असोथर क्षेत्र में पिछले कई दिनों से उपभोक्ताओं को मुश्किल से एक-दो घंटे ही बिजली मिल पा रही है। शनिवार से रविवार तक ट्रिपिंग का सिलसिला लगातार जारी रहा। कभी पांच मिनट तो कभी दस मिनट के लिए बिजली आती और फिर गुल हो जाती। रविवार सुबह करीब नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक करीब छह घंटे तक आपूर्ति पूरी तरह ठप रही। बिजली संकट का असर हरनवा, जरौली, सरकंडी, बेसड़ी, मनावा, कौडर, बौडर, सराय, टीकर, भैरवां, रिठवां, कटरा, बेरूई समेत करीब 150 गांवों में देखने को मिला। बिजली न मिलने से किसानों के अलावा ग्रामीण, छात्र, छोटे कारोबारी और इलेक्ट्रॉनिक दुकानदार भी प्रभावित हैं। पेयजल आपूर्ति, मोबाइल चार्जिंग और घरेलू कामकाज तक बाधित हो गए हैं। किसान राजू तिवारी ने बताया कि दो दिन से बिजली नहीं मिलने के कारण धान की रोपाई और पहले से लगी फसल की सिंचाई नहीं हो पा रही है। यदि जल्द आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो फसल को भारी नुकसान हो सकता है। ग्रामीण पुनीत ने बताया कि लगातार बिजली संकट के कारण भीषण गर्मी में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों का रहना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार के 24 घंटे बिजली आपूर्ति के दावे क्षेत्र में पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं।
तकनीकी खराबी बनी संकट की वजह
असोथर विद्युत उपकेंद्र के जूनियर इंजीनियर कमल कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि चुरियानी पावर हाउस से आने वाली 33 केवी लाइन अधिक लोड के कारण संचालित नहीं हो पा रही है। लाइन को चालू कराने का लगातार प्रयास किया जा रहा है, लेकिन तकनीकी समस्या के चलते सफलता नहीं मिल रही है। विभाग जल्द से जल्द आपूर्ति बहाल करने के प्रयास में जुटा हुआ है।
