ब्राजील चुनाव: सोशल मीडिया और ‘WhatsApp आर्मी’ के दम पर लूला ने पलटी हारी हुई बाजी, जनता ने ऐसे दिलाया बहुमत

सल्वाडोर: ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लुईज इनासियो लूला दा सिल्वा ने इतिहास रचते हुए एक बार फिर सत्ता में वापसी कर ली है। पहले दौर के चुनाव में अपने प्रतिद्वंदी और दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो से पिछड़ने के बाद, लूला की टीम ने डिजिटल और जमीनी स्तर पर ऐसा चक्रव्यूह रचा कि दूसरे दौर में पूरी बाजी ही पलट गई। लूला की इस करिश्माई जीत ने साबित कर दिया है कि चुनाव सिर्फ बड़ी रैलियों से नहीं, बल्कि व्हाट्सएप (WhatsApp) के एक सटीक संदेश से भी जीते जा सकते हैं।

खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):

• डिजिटल क्रांति: लूला ने सोशल मीडिया और अभूतपूर्व जनसमर्थन के दम पर ब्राजील चुनाव में जीत हासिल की।
• लूला आर्मी का कमाल: व्हाट्सएप पर बने एक चैनल से 1 करोड़ से अधिक समर्थक जुड़े, जिसने दुष्प्रचार को मात दी।
• जनता का पहरा: मतदान के दिन प्रशासन द्वारा बसें रोकने पर स्थानीय लोगों ने खुद गाड़ियों से मतदाताओं को पोलिंग बूथ तक पहुंचाया।
• बड़ी जीत: मजबूत गढ़ बाहिया में लूला को 73% वोट मिले, दूसरे दौर में करीब 1 करोड़ वोटों के अंतर से दर्ज की जीत।

WhatsApp पर खड़ी हुई 1 करोड़ समर्थकों की ‘लूला आर्मी’

लूला दा सिल्वा की इस डिजिटल रणनीति के पीछे ब्राजीलियाई सांसद आंद्रे जैनोनेस का दिमाग था। उन्होंने व्हाट्सएप पर ‘लूला आर्मी’ नाम से एक डिजिटल चैनल की शुरुआत की। शुरुआती दौर में इस चैनल से महज 50 हजार लोग जुड़े थे, लेकिन देखते ही देखते समर्थकों की चेन बनती गई और यह आंकड़ा 1 करोड़ (10 मिलियन) पार कर गया। इस नेटवर्क के जरिए लूला की टीम ने विपक्ष के हर हमले का तुरंत जवाब दिया और अपने लोक-कल्याणकारी संदेशों को सीधे मतदाताओं के मोबाइल तक पहुंचाया।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, लूला की टीम ने बोल्सोनारो सरकार की कमियों को मुख्य मुद्दा बनाया। मतदाताओं के बीच यह डर सही समय पर पहुंचाया गया कि अगर बोल्सोनारो दोबारा सत्ता में आए, तो गरीबों को मिलने वाली सरकारी सहायता बंद हो सकती है और देश का लोकतंत्र खतरे में पड़ सकता है।

जब प्रशासन ने रोकीं बसें, तो जनता बनी ‘सारथी’

मतदान के दिन एक बड़ा विवाद तब खड़ा हो गया जब बाहिया राज्य की राजधानी सल्वाडोर में मतदाताओं को ले जाने वाली करीब 944 मुफ्त सरकारी बसों को डिपो में ही खड़ा रख दिया गया। शहर के मेयर ब्रूनो रेइस ने तर्क दिया कि बसों पर सरकारी स्टिकर होने के कारण इन्हें चुनाव प्रचार माना जा सकता है। अदालत के विश्लेषकों के मुताबिक, मतदान के दिन जानबूझकर लगभग 30% बसों का संचालन रोक दिया गया ताकि लोग वोट डालने न जा सकें।
लेकिन प्रशासन की इस पाबंदी के आगे ब्राजील की जनता नहीं झुकी। स्थानीय नागरिकों, शिक्षकों और यहाँ तक कि उबर (Uber) चालकों ने मोर्चा संभाला। लोगों ने अपनी निजी कारों और गाड़ियों से मतदाताओं को मुफ्त में पोलिंग बूथ तक पहुंचाना शुरू कर दिया। इस मामले में चुनावी अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए शहर के परिवहन प्रमुख पाब्लो सूजा को गिरफ्तार करने का आदेश भी जारी किया।

नतीजों में दिखे ‘सिकंदर’, बोल्सोनारो के आरोप खारिज

जनता के इस भारी समर्थन का नतीजा यह हुआ कि लूला ने अपने मजबूत गढ़ सल्वाडोर में अकेले 73 प्रतिशत वोट हासिल किए। दूसरे दौर की गिनती पूरी होने तक लूला ने करीब एक करोड़ मतों के भारी अंतर से ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
हार से बौखलाए बोल्सोनारो ने चुनावी नतीजों और मतदान के समय को लेकर सवाल उठाए, लेकिन ब्राजील की संघीय चुनावी अदालत ने उनके सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए लूला दा सिल्वा की जीत पर अंतिम मुहर लगा दी।

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