NEET-PG प्रवेश प्रक्रिया में होगा बड़ा बदलाव, पर्सेंटाइल सिस्टम की जगह लागू होगी रैंक आधारित मेरिट व्यवस्था

नई दिल्ली। मेडिकल की पोस्ट ग्रेजुएट पढ़ाई में दाखिले की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने NEET-PG और NEET-SS की काउंसलिंग प्रक्रिया में मौजूदा पर्सेंटाइल आधारित व्यवस्था को समाप्त कर रैंक आधारित मेरिट सिस्टम अपनाने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। केंद्र सरकार की ओर से यह जानकारी 3 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में दी गई।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अभ्यर्थियों के परिणाम में पर्सेंटाइल के बजाय उनकी रैंक जारी की जाएगी। दाखिले की प्रक्रिया इसी रैंक के आधार पर संचालित करने की योजना है। हालांकि, इसके लिए नए नियमों को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। प्रस्तावित बदलाव 2027 से लागू किए जाने पर विचार किया जा रहा है।

12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने दिया सुझाव

NEET-PG प्रवेश प्रक्रिया में बार-बार होने वाली समस्याओं को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने 12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। इस समिति ने परीक्षा और काउंसलिंग व्यवस्था की समीक्षा करने के बाद अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की है।

समिति का मानना है कि मेडिकल की पोस्ट ग्रेजुएट सीटें खाली रहने पर बार-बार क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल कम करना उचित समाधान नहीं है। इससे मेडिकल शिक्षा के न्यूनतम मानकों पर असर पड़ने की आशंका रहती है।

नेगेटिव मार्क्स वाले अभ्यर्थियों को भी मिली थी पात्रता

NEET-PG की मौजूदा व्यवस्था में निर्धारित पर्सेंटाइल के आधार पर अभ्यर्थियों को काउंसलिंग के लिए पात्र घोषित किया जाता है। हालांकि, सीटें खाली रहने की स्थिति में संबंधित प्राधिकरण क्वालिफाइंग कटऑफ घटा सकते हैं।

जनवरी 2026 में NEET-PG काउंसलिंग के तीसरे राउंड के लिए कटऑफ में बड़ी कटौती की गई थी। सामान्य और EWS वर्ग का क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल 50 से घटाकर 7 कर दिया गया था। वहीं सामान्य वर्ग के दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए इसे 45 से घटाकर 5 और SC, ST तथा OBC वर्ग के लिए 40 से घटाकर शून्य कर दिया गया था। इस बदलाव के बाद नेगेटिव अंक पाने वाले अभ्यर्थी भी काउंसलिंग के पात्र हो गए थे।

इस फैसले को लेकर मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता और प्रवेश के न्यूनतम मानकों पर सवाल उठे थे। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद अदालत ने स्थायी समाधान तलाशने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की दिशा में कदम उठाया।

खाली सीटों को भरने के लिए फीस में कटौती का सुझाव

विशेषज्ञ समिति ने केवल परीक्षा प्रणाली में बदलाव की सिफारिश नहीं की है, बल्कि मेडिकल कॉलेजों में खाली रह जाने वाली पोस्ट ग्रेजुएट सीटों को भरने के लिए कई अन्य सुझाव भी दिए हैं।

समिति ने नॉन-क्लीनिकल पाठ्यक्रमों की फीस कम करने की सिफारिश की है, ताकि अधिक अभ्यर्थी इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने के लिए प्रोत्साहित हों। इसके अलावा प्री-क्लीनिकल और पैरा-क्लीनिकल विषयों में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों को सर्विस बॉन्ड से छूट देने का सुझाव भी दिया गया है।

काउंसलिंग प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने पर जोर

समिति ने मेडिकल काउंसलिंग में होने वाली देरी को दूर करने के लिए डिजिटल व्यवस्था मजबूत करने की आवश्यकता बताई है। इसके तहत सीटों का सत्यापित डाटा काउंसलिंग शुरू होने से पहले उपलब्ध कराने, निर्धारित वार्षिक काउंसलिंग कैलेंडर तैयार करने और राज्यों के साथ परीक्षा परिणाम ऑनलाइन साझा करने की सिफारिश की गई है।

इसके अतिरिक्त सीट ब्लॉक करने की घटनाओं को रोकने के लिए KYC और बायोमेट्रिक सत्यापन जैसी व्यवस्थाएं लागू करने का सुझाव दिया गया है।

अंतिम नियमों का होना बाकी

विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने सैद्धांतिक सहमति जताई है, लेकिन नई व्यवस्था से संबंधित नियम अभी अंतिम रूप में जारी नहीं हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट पेश होने के बाद याचिकाकर्ताओं को अपनी प्रतिक्रिया दाखिल करने का समय दिया गया है।

ऐसे में NEET-PG और NEET-SS अभ्यर्थियों को नए नियमों की आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना होगा। यदि प्रस्ताव लागू होता है तो मेडिकल पोस्ट ग्रेजुएट प्रवेश प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *