शंखचूड़-तुलसी विवाह व महर्षि दधीचि के त्याग की सुनीं कथा
शंखचूड़-तुलसी विवाह व महर्षि दधीचि के त्याग की सुनीं कथा
शंखचूड़-तुलसी विवाह व महर्षि दधीचि के त्याग की सुनीं कथा
– स्वामी आत्मानंद गिरि जी महाराज ने बताया धर्म, तपस्या व समर्पण का महत्व
फोटो परिचय- प्रवचन करते स्वामी आत्मानन्द गिरि जी महाराज। एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज फतेहपुर। जनपद के मलवां विकास खंड अंतर्गत रेवाड़ी बुजुर्ग गांव की सब्जी मंडी परिसर में नवयुवक जागरण मंच की रजत जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित नौ दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा एवं रामलीला महोत्सव में मंगलवार को श्रद्धा व भक्ति की अनुपम छटा देखने को मिली। कथा व्यास स्वामी आत्मानंद गिरि जी महाराज ने शंखचूड़-तुलसी विवाह, महर्षि दधीचि के त्यागमय जीवन तथा धर्मकन्या तुलसी से जुड़े विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कथा के दौरान स्वामी आत्मानंद गिरि जी महाराज ने शंखचूड़ व तुलसी के प्रसंग के माध्यम से धर्म, आस्था, निष्ठा और समर्पण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने भारतीय सनातन परंपरा में तुलसी के विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, पवित्रता तथा ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का संदेश दिया। महर्षि दधीचि के चरित्र का वर्णन करते हुए महाराज जी ने उनके अद्वितीय त्याग, कठोर तपस्या और लोककल्याण के लिए किए गए महान बलिदान की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि महर्षि दधीचि का जीवन परोपकार, कर्तव्यनिष्ठा और मानवता के हित में सर्वस्व समर्पित करने की प्रेरणा देता है।
उनका त्याग भारतीय संस्कृति में सेवा और समर्पण की महान परंपरा का प्रतीक है। स्वामी जी ने श्रद्धालुओं को धर्म, सदाचार व आध्यात्मिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का संदेश दिया। कथा के दौरान श्रद्धालु धार्मिक प्रसंगों को एकाग्रचित्त होकर सुनते रहे। पूरा पंडाल भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत नजर आया तथा हर-हर महादेव के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा। इस अवसर पर डॉ. प्रशांत पाण्डेय, अजीत कुमार सैनी, पीयूष दीक्षित, रवि मिश्रा, नीरज अग्निहोत्री, रमाकांत सैनी, महेंद्र अग्निहोत्री, अंकित, ऋतिक, लल्लू अग्निहोत्री, पम्मू मिश्रा, नरेश कुशवाहा, अशोक निषाद सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।