वैन में ठूंसकर ले जाए जा रहे मासूम, बच्चों ने बताई आपबीती,सुरक्षा से खिलवाड
वैन में ठूंसकर ले जाए जा रहे मासूम, बच्चों ने बताई आपबीती,सुरक्षा से खिलवाड
बांदा में स्कूली बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड
– वैन में ठूंसकर ले जाए जा रहे मासूम, बच्चों ने बताई आपबीती
ब्यूरो सुरेंद्र धुरिया अज़रा न्यूज बांदा – जनपद के सपा कार्यालय के पास सेंट नेरौली जे.पी. सिंह इंटर कालेज बाँदा की वैन में बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रत्येक शिक्षण संस्थान की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजते समय भरोसा करते हैं कि विद्यालय प्रबंधन उनकी पढ़ाई के साथ-साथ सुरक्षित आवागमन की भी व्यवस्था करेगा। लेकिन जब छोटे-छोटे बच्चों को वैन में क्षमता से अधिक बैठाकर ले जाने की शिकायतें सामने आती हैं, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। बांदा के सेंट नेरौली जे.पी. सिंह इंटर कॉलेज की वैन में बच्चों को कथित तौर पर ठूंसकर ले जाने का मामला सामने आया है। वैन में बैठे बच्चों ने खुद अपनी परेशानियां बताते हुए कहा कि उन्हें ठीक से बैठने तक की जगह नहीं मिलती और स्कूल बैग रखने में भी दिक्कत होती है।
मामले से जुड़ी तस्वीर वीडियो और बच्चों के बयानों ने स्कूली वाहनों की व्यवस्था तथा बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि बच्चों के मुताबिक, वैन में एक ऐसा बच्चा भी बैठा था, जिसके पैर में फ्रैक्चर है। ऐसे में सवाल उठता है कि चोटिल बच्चे को सुरक्षित तरीके से बैठाने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई और क्या विद्यालय प्रबंधन बच्चों की सुविधाओं पर पर्याप्त ध्यान दे रहा है?बच्चों ने यह भी बताया चोटिल बच्चे को वैन में बैठकर सफर करने के दौरान काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। यदि किसी बच्चे के पैर में फ्रैक्चर है, तो उसे अतिरिक्त सावधानी और आरामदायक बैठने की व्यवस्था की आवश्यकता होती है। ऐसे में यह जांच जरूरी है कि संबंधित बच्चे के लिए सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था की गई है या नहीं।बच्चों ने यह भी बताया कि दो बच्चे उस दिन अनुपस्थित थे, वे भी इसी वैन से आते-जाते हैं। बच्चों के इस बयान के बाद वैन में नियमित रूप से कितने विद्यार्थी सफर करते हैं और वाहन की निर्धारित क्षमता कितनी है, इसकी जांच आवश्यक हो गई है।स्कूली वाहनों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। यदि वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया जाता है, तो बच्चों को ठीक से बैठने, सुरक्षित रहने और आपात स्थिति में बाहर निकलने में परेशानी हो सकती है। अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं, तो उन्हें यह भरोसा भी होना चाहिए कि उनके बच्चे घर से स्कूल और स्कूल से घर तक सुरक्षित पहुंचेंगे। यदि वाहन में बच्चों को पर्याप्त जगह नहीं मिल रही है, तो इस समस्या को दूर करना जरूरी है। बच्चों की सुरक्षा के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही को सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। मामले की जानकारी जुटाने और कालेज प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए जब मीडियाकर्मी सेंट नेरौली जे.पी. सिंह इंटर कालेज पहुंचे, तो उन्होंने प्रधानाचार्य से मुलाकात कर वैन में बच्चों को बैठाने की व्यवस्था के संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया। इस दौरान कालेज कार्यालय में मौजूद रामनरेश सिंह से मीडियाकर्मियों ने प्रधानाचार्य के बारे में पूछा और बताया कि वे वैन से संबंधित मामले में जानकारी लेने आए हैं। इस पर रामनरेश सिंह ने बताया कि प्रधानाचार्य की तबीयत खराब है और वह उन्हें डॉ. को दिखाकर लाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानाचार्य फिलहाल बात नहीं कर पाएंगे। इसके बाद उन्होंने मीडियाकर्मियों से पूछा कि उन्हें क्या जानकारी चाहिए और वे प्रधानाचार्य से क्यों मिलना चाहते हैं। जब मीडियाकर्मियों ने वैन में बच्चों को बैठाने की व्यवस्था और उनकी सुरक्षा से जुड़े सवाल पूछे, तो आरोप है कि रामनरेश सिंह का मिजाज गर्म हो गया। उन्होंने वैन की व्यवस्था को लेकर अपनी बात रखते हुए कहा कि ड्राइवर पेट्रोल चोरी कर लेते हैं और आए दिन स्कूली वाहन खराब हो जाते हैं। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि ऐसी स्थिति में क्या काम बंद कर दिया जाए? हालांकि, वाहन खराब होने या ड्राइवर से संबंधित किसी समस्या का होना बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सवालों का समाधान नहीं है। यदि वाहन में बच्चों को पर्याप्त जगह नहीं मिल रही है, तो कॉलेज प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि वह इस व्यवस्था की समीक्षा करे और बच्चों को सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
वीडियो बनाने पर जताई नाराजगी
बांदा। मीडियाकर्मियों के अनुसार, बातचीत के दौरान रामनरेश सिंह ने पत्रकारों से यह भी पूछा कि उन्हें वैन का वीडियो बनाने की अनुमति किसने दी है और उनसे अपना पहचान पत्र दिखाने को कहा। आरोप है कि उन्होंने पत्रकारों को एफआईआर दर्ज कराने की धमकी भी दी तथा कहा कि वह पत्रकारों को फोन लगाते हैं। इस पर मीडियाकर्मियों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि वे संबंधित अधिकारी से उनका परिचय प्राप्त कर सकते हैं और जिन्हें फोन करना है, वे कर सकते हैं। पत्रकारों के मुताबिक, उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी को उनके काम पर आपत्ति है, तो वह नियमानुसार संबंधित अधिकारियों से शिकायत भी कर सकते है। यहां महत्वपूर्ण सवाल यह है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामले में उठाए गए सवालों का जवाब देने के बजाय बातचीत का केंद्र पत्रकारों की पहचान और वीडियो बनाने की अनुमति पर क्यों आ गया? मामले को लेकर जब मीडियाकर्मियों ने परिवहन विभाग के एआरटीओ श्याम लाल से बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि जुलाई माह में संबंधित कॉलेज की इस वैन के विरुद्ध फिटनेस को लेकर कार्रवाई की गई थी और जुर्माना भी लगाया गया था।एआरटीओ के इस बयान के बाद मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है। यदि संबंधित वैन के विरुद्ध पहले भी फिटनेस को लेकर कार्रवाई की जा चुकी है, तो यह जांच करना जरूरी है कि उस समय क्या कमियां पाई गई थीं, उन्हें दूर किया गया या नहीं और वर्तमान में वाहन नियमानुसार संचालित हो रहा है या नहीं। यह भी स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि पहले की कार्रवाई के बाद वाहन की फिटनेस की स्थिति क्या है तथा उसमें बच्चों को बैठाने की व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं। एआरटीओ श्याम लाल ने मामले को संज्ञान में लेकर उचित कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिया है। अब देखना होगा कि परिवहन विभाग की ओर से वाहन की वर्तमान स्थिति की जांच कर क्या कदम उठाए जाते हैं। इस पूरे मामले में तीन प्रमुख सवाल सामने आ रहे हैं। पहला, क्या वैन में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया जाना उचित है? दूसरा, जुलाई में फिटनेस को लेकर कार्रवाई और जुर्माने के बाद वाहन की वर्तमान स्थिति क्या है? तीसरा, बच्चों को सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन उपलब्ध कराने के लिए कालेज प्रबंधन ने व्यवस्था क्यों नहीं की ? बच्चों के बयानों, वैन की स्थिति और एआरटीओ द्वारा बताई गई पूर्व कार्रवाई के मद्देनजर संबंधित विभागों को मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। जांच में वाहन की फिटनेस, पंजीकरण, परमिट और लागू सुरक्षा मानकों के साथ-साथ उसमें नियमित रूप से सफर करने वाले बच्चों की संख्या की भी पड़ताल की जानी चाहिए