नायब तहसीलदार पर लगाए रिश्वतखोरी के गंम्भीर आरोप, लगाई न्याय की गुहार!

     पीड़िता ने नायब तहसीलदार पर लगाए रिश्वतखोरी के गंम्भीर आरोप, जिलाधिकारी से लगाई न्याय की गुहार!

फतेहपुर की सदर तहसील मे किया गया बड़ा खेल,कुछ राजस्वकर्मियों ने समझ रखीं है रिश्वतखोरी को अपनी जागीर!

सूत्रों के मुताबिक हर तहसील की पत्रावलियों मे पूछते है पेशकारों से कि इसमे कुछ है कि नहीं,उसी फाईल का होता है निस्तारण!

पीडिता ने विशेष सचिव उत्तर प्रदेश शासन को एक शिकायती पत्र भेजा है,जिसमें अगले सप्ताह जिलाधिकारी फतेहपुर को जांच के लिए पत्र जारी हो सकता है!

अजय सिंह अज़रा न्यूज फतेहपुर  फतेहपुर — जिले की सदर तहसील मे व्याप्त भ्रष्टाचार के आरोप प्रत्यारोप सदैव से लगते आ रहें है,कई बार बीडिंयों भी वायरल हुए है।लेकिन तहसील प्रशासन मौन साध लेता है।हरदम विवादों मे रहने के कारण अक्सर सुर्खियों मे बनी रहती है तहसील।

अब एक बार फिर गंभीर विवादों के केंद्र में आ गई है। इस बार मामला सीधे-सीधे राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश के आदेश, राजस्व अभिलेखों में कथित हेरफेर, नामांतरण प्रक्रिया और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। एक पीड़िता ने जिलाधिकारी फतेहपुर को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि माननीय सदस्य राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश, प्रयागराज द्वारा पारित स्थगन आदेश के बावजूद उसके नाम दर्ज भूमि को राजस्व अभिलेखों से हटाकर विपक्षी पक्ष का नाम दर्ज कर दिया गया। आखिर यह किन परिस्थितियों मे कर दिया गया। पीड़िता ने नायब तहसीलदार राकेश कुमार वर्मा पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, अभिलेखों की समीक्षा तथा न्यायिक आदेशों की अवहेलना करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत सामने आने के बाद पूरे राजस्व विभाग में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।सोशल मीडिया मे वायरल हो रहा राजस्व परिषद के आदेश के बावजूद कार्रवाई का आरोप पीड़िता द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में कहा गया है कि उसका मामला राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश, प्रयागराज में विचाराधीन था। शिकायत के अनुसार माननीय सदस्य राजस्व परिषद ने शिकायतकर्ता का आरोप है कि उक्त आदेश प्रभावी होने के सदर तहसील में अमलदरामद की प्रक्रिया कराते हुए उसके नाम को खारिज कर दिया गया और प्रतिवादी का नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज कर लिया गया।यदि शिकायतकर्ता का दावा सही पाया जाता है तो यह मामला केवल एक नामांतरण विवाद नहीं बल्कि उच्च राजस्व प्राधिकारी के आदेशों के अनुपालन पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

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