जब वर्दी भी रो पड़ी… जालौन में शहीदों को नम आंखों से अंतिम सलाम

   जब वर्दी भी रो पड़ी… जालौन में शहीदों को नम आंखों से अंतिम सलाम

दीपक धुरिया अजरा न्यूज़ जालौन  —    बुधवार का दिन हर किसी के लिए बेहद भावुक और दिल को झकझोर देने वाला रहा। यह सिर्फ एक अंतिम यात्रा नहीं थी, बल्कि ऐसा मंजर था जब पूरा प्रशासनिक और पुलिस तंत्र शोक में डूबा नजर आया। पुलिस लाइन से लेकर अमर शहीद स्मारक तक हर कदम भारी था और हर आंख नम।
तिरंगे में लिपटे शहीद जवानों को अंतिम विदाई देने के लिए डीजी, आईजी और डीएम जैसे वरिष्ठ अधिकारी खुद कंधा देते हुए नजर आए। जिन चेहरों पर आमतौर पर सख्ती और जिम्मेदारी दिखती है, आज उन्हीं आंखों में आंसू साफ दिखाई दे रहे थे। इस क्षण में पद और रैंक पीछे छूट गए थे, और सामने था सिर्फ इंसानियत और गहरा दुख।


एक ओर शहीदों के पार्थिव शरीर थे, तो दूसरी ओर बिलखते परिजन। रोती हुई पत्नियां, बेसुध होती माताएं और मासूम बच्चे—जो शायद अभी यह भी नहीं समझ पा रहे कि उनका अपना अब कभी लौटकर नहीं आएगा—यह दृश्य हर किसी का दिल चीर देने वाला था।
शहीद सिपाही प्रदीप की पत्नी मयूरी बार-बार पार्थिव शरीर से लिपटकर बेहोश हो रही थीं। वहीं दरोगा सत्यभान सिंह के परिवार की आंखों में भी दर्द साफ झलक रहा था। उनकी बेटी और अन्य परिजन नम आंखों से अंतिम विदाई दे रहे थे।
इस दौरान पुलिस परिवार के साथ-साथ सेवानिवृत्त जवान भी अपने साथियों को अंतिम सलाम देने पहुंचे। पूरा पुलिस विभाग एक परिवार की तरह इस गहरे दुख में एकजुट दिखाई दिया।
उरई पुलिस लाइन में भी शोक का माहौल छाया रहा। पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह मौके पर पहुंचे और परिजनों से मिलकर उनका दर्द साझा किया। इस दौरान उनकी आंखें भी नम हो गईं। उनके साथ एएसपी ईशान सोनी भी मौजूद रहे, जिन्होंने परिवारों को ढांढस बंधाया और भरोसा दिलाया कि पूरा विभाग उनके साथ खड़ा है।
मौके पर विधायक विनोद चतुर्वेदी सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। हर कोई शहीदों को अंतिम विदाई देने और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एकत्र हुआ।
यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि बलिदान, सम्मान और दर्द की वह कहानी है जिसे जालौन कभी नहीं भूल पाएगा।

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