चाय की सियासत, मुस्लिम वोटरों की कयादत,, पर खुली पोल

    चाय की सियासत, मुस्लिम वोटरों की कयादत,, पर खुली पोल
👉समाजवादी पार्टी से मुस्लिमों वोटरों की नाराजगी क्यों ?
👉राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के दौरे से जिला कमेटी की सक्रियता पर सवाल ?
👉चर्चा या नाराजगी की वजह यदि चाय की होटल में रुके तो एक दिन पूर्व दिवंगत हुए क़ाज़ी शहर के घर क्यों नहीं गए ?
👉जिलाध्यक्ष की निष्क्रियता, मुस्लिम वोटर मान रहे वजह, यादव बनाम मुस्लिम समाजवादी के बीच खाई तो नहीं बन रही।
👉समाजवादी पार्टी को पूरी ताकत से वोट करने वाले मुस्लिम वोटरों को “कहां जाएंगे” जैसे लक़ब से नवाजा जाना कितना सहज माना जाना चाहिए।
👉यदि छोटे बड़े चुनावों पर नज़र डाली जाए तो,, यादव नेताओं को मुस्लिम वोटरों द्वारा चुना जाना तो देखा जा सकता है,,, लेकिन यादव वोटरों से मुस्लिम नेताओं का निकला पाना असमंजस सा क्यों लगता है ?

एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज फतेहपुर

फतेहपुर – विगत दिनों आर्यन चाय की घटना से समाजवादी पार्टी की सारी हमदर्दी मुस्लिमों के लिए खुली आंखों से दिखने लगी।
जबकि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोटरों का अनुपात किसी एक जाति के मुकाबले बहुत अधिक है। वहीं यादव जाति से उनका अनुपात ढाई गुना से अधिक है। फिर मुस्लिम पार्टी कही जाने वाली समाजवादी पर सदैव शिकायती प्रश्न चिन्ह क्यों लगते है ? यदि जिले के एक बड़े जनाधार वाले बदनाम शुदा मुस्लिम नेता “हाजी रज़ा” का नाम हटा दिया जाए तो राष्ट्रीय अध्यक्ष को दो दिन पूर्व हुए दिवंगत मुस्लिम रहनुमा मरहूम शहर क़ाज़ी का परिवार नजर क्यों नहीं आया।
चलो एक बार मान भी लिया जाए कि मरहूम क़ाज़ी शहर फरीदुद्दीन के यतीम परिवार से मिलना प्रोटो काल में नहीं रहा फिर चाय वाला प्रोटोकाल में कैसे आ गया।
यहां जिले की फोटो शॉप निष्क्रिय कार्यकारिणी की अपनी जिम्मेदारी बनती थी कि वो राष्ट्रीय अध्यक्ष को याद दिलाते खास कर जिसमें जिला अल्पसंख्यक कमेटी के पदाधिकारियों पर तो और भी।
सपा के बड़े नेताओं द्वारा उनके बयान के अनुसार घटित घटना क्षेत्र में राष्ट्रीय अध्यक्ष “अखिलेश यादव” का पुतला फूंका जाना सुनियोजित ही सही लेकिन उसके फ़ौरन बाद जिला कार्यकारिणी का बिजली के मानिंद एक्टिव हो जाना और कई बार क्षेत्र में बड़े नेताओं द्वारा दौरे लगना फिर से मुस्लिम वोटरों के सवालिया घेरे में आते दिखाई देने लगे।
घटना एक ही नहीं है। बात अगर आगे की जाए तो जिला कमेटी की निष्क्रियता का घेरे में आना स्वाभाविक होता जा रहा। चाहे मकबरा घटना रही हो, शहर क़ाज़ी के परिवार के पुरसाहाल की रही हो या फिर समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष रहे “सूरज पाल” की बहू का मामला रहा हो। प्रतिभा कैथल जो किसी घटना के तहत 24 जून 2025 को 70% जल गई और प्रांसी अस्पताल में भर्ती है। जिसकी भनक भी राष्ट्रीय क्या प्रदेश के उच्च पदाधिकारियों तक नहीं पहुंच पाई जहां उनकी मदद तो दूर उनसे मिलने की ज़हमत नहीं उठा पाया।
यदि समय रहते जिला कार्यकारिणी के साथ अन्य इकाइयों में बदलाव नहीं होता तो आगे 2027 के हालात 2024 जैसे परिणाम भुगतने को तैयार रहे – अज़रा न्यूज फतेहपुर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *