नई दिल्ली। भारत ने स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक दशक में देश की नवीकरणीय बिजली उत्पादन क्षमता लगभग चार गुना बढ़ गई है। वर्ष 2026 में यह क्षमता 300 गीगावाट के आंकड़े को पार कर चुकी है। इस विस्तार से भारत को कोयले और प्राकृतिक गैस के आयात पर 100 अरब डॉलर से अधिक की बचत हुई है।
नई दिल्ली में आयोजित भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट-2026 के दौरान जारी ‘इंडिया रिन्यूएबल एनर्जी मार्केट रिपोर्ट 2026’ में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया का दूसरा सबसे तेजी से बढ़ता नवीकरणीय ऊर्जा बाजार बन गया है। साथ ही सौर फोटोवोल्टिक (PV) मॉड्यूल के निर्माण में भी भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।
निर्धारित समय से पांच साल पहले हासिल किया लक्ष्य
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने वर्ष 2025 में ही अपनी स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों से हासिल करने का लक्ष्य पूरा कर लिया था। यह उपलब्धि निर्धारित समयसीमा से पांच साल पहले प्राप्त हुई।
सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और जैव ऊर्जा के विस्तार से देश की पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम हुई है। इसके परिणामस्वरूप बिजली उत्पादन के लिए विदेशों से कोयला और प्राकृतिक गैस मंगाने की जरूरत में भी कमी आई है।
15 वर्षों में 100 अरब डॉलर से अधिक की बचत
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के आकलन के अनुसार, वर्ष 2011 से 2025 के बीच नवीकरणीय बिजली उत्पादन के कारण भारत ने कोयले और प्राकृतिक गैस के आयात पर 100 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की बचत की है।
रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि यदि वर्ष 2010 के बाद सौर, पवन और जैव ऊर्जा की क्षमता में वृद्धि नहीं हुई होती, तो वर्ष 2025 में भारत को लगभग 11 करोड़ टन अतिरिक्त कोयले का आयात करना पड़ता।
एजेंसी का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक आयात में होने वाली कुल बचत मौजूदा स्तर से दोगुने से भी अधिक हो सकती है।
2030 तक 530 गीगावाट पहुंच सकती है क्षमता
IEA की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की नवीकरणीय बिजली उत्पादन क्षमता वर्ष 2030 तक लगभग 530 गीगावाट पहुंचने का अनुमान है। इसमें सबसे बड़ी भूमिका सौर ऊर्जा की होगी। अनुमान है कि नई क्षमता में 80 प्रतिशत से अधिक योगदान सौर ऊर्जा का रहेगा।
इसके साथ ही पवन ऊर्जा, जलविद्युत और जैव ऊर्जा के क्षेत्र में भी विस्तार होने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2030 तक देश में नवीकरणीय बिजली उत्पादन लगभग 950 टेरावाट घंटे तक पहुंच सकता है।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा विस्तार
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच भारत में नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि लगातार बेहतर नीतियों और निवेश के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा की लागत कम करने में भारत ने महत्वपूर्ण प्रगति की है।
वहीं केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि देश की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के लिए घरेलू विनिर्माण, निवेश और बिजली पारेषण नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है।
आगे की राह में बुनियादी ढांचे की चुनौती
रिपोर्ट में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के साथ कुछ चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। इनमें बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार, ऊर्जा भंडारण की क्षमता बढ़ाना, बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति सुधारना और परियोजनाओं में होने वाली देरी कम करना शामिल है।
IEA के अनुसार, यदि इन चुनौतियों का प्रभावी समाधान किया जाता है तो वर्ष 2026 से 2030 के बीच भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में होने वाली वृद्धि 20 प्रतिशत से अधिक तेज हो सकती है।
