अदाणी समूह का बड़ा विदेशी अधिग्रहण, नीदरलैंड की Evos कंपनी खरीदेगा अदाणी पोर्ट्स; 27 हजार करोड़ रुपये में हुई डील

नई दिल्ली। अदाणी समूह ने अपने अंतरराष्ट्रीय कारोबार का विस्तार करते हुए यूरोप की बड़ी लिक्विड स्टोरेज कंपनी Evos B.V. के अधिग्रहण का समझौता किया है। अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) ने नीदरलैंड की इस कंपनी में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए इग्नियो इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर्स (Igneo Infrastructure Partners) के साथ समझौता किया है। इस सौदे का कुल एंटरप्राइज वैल्यू 2.56 अरब यूरो यानी करीब 27 हजार करोड़ रुपये है, जबकि इक्विटी वैल्यू 1.18 अरब यूरो निर्धारित की गई है।

कंपनी की ओर से जारी बयान के मुताबिक, यह पूरा सौदा नकद में किया जाएगा। अधिग्रहण के लिए 1.18 अरब यूरो की इक्विटी वैल्यू तय की गई है। यह सौदा वर्ष 2025 के EV/EBITDA के आधार पर 11.7 गुना अधिग्रहण मल्टीपल दर्शाता है।

क्या काम करती है Evos कंपनी?

Evos यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी स्वतंत्र लिक्विड स्टोरेज ऑपरेटर कंपनी है। इसकी यूरोप के पांच देशों में आठ बंदरगाह आधारित टर्मिनल संचालित करने की व्यवस्था है। इनमें नीदरलैंड, जर्मनी, स्पेन, बेल्जियम और माल्टा शामिल हैं।

कंपनी के पास कुल 63 लाख घन मीटर की भंडारण क्षमता है। इसके टर्मिनल यूरोप के प्रमुख ऊर्जा और औद्योगिक केंद्रों में स्थित हैं। इनमें एम्स्टर्डम-रॉटरडैम-एंटवर्प क्षेत्र, हैम्बर्ग और भूमध्यसागरीय क्षेत्र शामिल हैं।

Evos के नेटवर्क में कुल 452 टैंक और जहाजों व बार्ज के लिए 63 बर्थ हैं। इसके अलावा कई एकीकृत पाइपलाइन कनेक्टिविटी भी मौजूद हैं, जिनमें शिफोल एयरपोर्ट और सेंट्रल यूरोप पाइपलाइन सिस्टम शामिल हैं।

2025 में 392 मिलियन यूरो रहा कंपनी का राजस्व

वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो कैलेंडर वर्ष 2025 में Evos ने 392 मिलियन यूरो का राजस्व अर्जित किया, जबकि उसका EBITDA 219 मिलियन यूरो रहा। कंपनी का EBITDA मार्जिन 56 प्रतिशत दर्ज किया गया।

वर्ष 2025 के दौरान कंपनी ने 37 मिलियन मीट्रिक टन कार्गो का संचालन किया। इसके अलावा कंपनी की औसत व्यावसायिक भंडारण क्षमता का उपयोग 99 प्रतिशत रहा। कंपनी के राजस्व का बड़ा हिस्सा दीर्घकालिक अनुबंधों और महंगाई दर से जुड़े समझौतों पर आधारित है।

कर्ज के जरिए पूरा होगा अधिग्रहण

अदाणी पोर्ट्स इस अधिग्रहण के लिए कर्ज के माध्यम से वित्तीय व्यवस्था करेगी। हालांकि, सौदे को पूरा करने के लिए नियामकीय और अन्य आवश्यक मंजूरियां लेनी होंगी। इसके साथ ही वर्क्स काउंसिल के साथ परामर्श की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी।

दोनों कंपनियों के संयुक्त कारोबार का प्रो-फॉर्मा नेट डेट-टू-EBITDA अनुपात 2.76 गुना है। यह आंकड़ा अदाणी पोर्ट्स के वित्त वर्ष 2026 और Evos के कैलेंडर वर्ष 2025 के वित्तीय परिणामों पर आधारित है। वित्त वर्ष 2027 तक इसके करीब 2.5 गुना रहने का अनुमान जताया गया है।

करण अदाणी ने बताया महत्वपूर्ण उपलब्धि

अदाणी पोर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर करण अदाणी ने कहा कि Evos का कंपनी के पोर्टफोलियो में शामिल होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे कंपनी को दुनिया के प्रमुख लिक्विड स्टोरेज और ऊर्जा केंद्रों में मजबूत उपस्थिति बनाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य एक अरब टन कार्गो का संचालन करने के साथ वैश्विक स्तर पर एकीकृत परिवहन प्लेटफॉर्म तैयार करना है। यूरोप के साथ साझेदारी और वहां सतत ऊर्जा परिवर्तन में सहयोग देना भी कंपनी की प्राथमिकताओं में शामिल है।

10 देशों में 28 बंदरगाहों और टर्मिनलों तक पहुंचेगा कारोबार

इस अधिग्रहण के बाद अदाणी पोर्ट्स का वैश्विक नेटवर्क बढ़कर 10 देशों में 28 बंदरगाहों और टर्मिनलों तक पहुंच जाएगा। कंपनी के मुताबिक, यह अधिग्रहण उसके तरल पदार्थों के भंडारण कारोबार का विस्तार करने के साथ भौगोलिक विविधता और नकदी प्रवाह को भी मजबूत करेगा।

Evos के कारोबार में पेट्रोल, गैस ऑयल, समुद्री ईंधन और जेट फ्यूल जैसे पारंपरिक उत्पादों के अलावा सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल, बायोफ्यूल, मेथनॉल और बायोएथेनॉल जैसे नए ऊर्जा उत्पाद भी शामिल हैं।

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