जमानत मंजूर, फिर भी जेल में बंद! जमानतगीर के अभाव वाले बंदियों की बनेगी सूची

    जमानत मंजूर, फिर भी जेल में बंद! जमानतगीर के अभाव वाले बंदियों की बनेगी सूची

संवाददाता दीपक धुरिया जालौन उरई। जमानत मंजूर होने के बावजूद जमानतगीर के अभाव में जेल में निरुद्ध बंदियों को अब शीघ्र राहत दिलाने की कवायद शुरू की गई है। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर सोमवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती मनाली चन्द्रा ने जिला कारागार उरई का साप्ताहिक निरीक्षण कर बंदियों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने विभिन्न बैरकों का जायजा लेते हुए जेल प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान सचिव ने निर्देशित किया कि ऐसे सभी बंदियों की सूची तैयार कर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए, जिनकी जमानत सक्षम न्यायालय से स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन जमानतगीर उपलब्ध नहीं होने के कारण उनकी रिहाई लंबित है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में प्रभावी पैरवी करते हुए नियमानुसार बंदियों को जल्द से जल्द राहत दिलाने का प्रयास किया जाए।

आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों की जमानत के लिए राज्य की ओर से जिला अधिकार प्राप्त समिति के माध्यम से उपलब्ध कराई जाने वाली विधिक सहायता की प्रक्रिया की भी जानकारी ली गई। सचिव ने स्पष्ट किया कि जिन बंदियों के पास निजी अधिवक्ता नहीं हैं या किसी कारणवश उनके मुकदमे की समुचित पैरवी नहीं हो पा रही है, उन्हें नियमानुसार निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

महिला बंदियों और उनके साथ रह रहे बच्चों की चिकित्सा, खान-पान तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया गया। इसके साथ ही बंदियों से उनके मुकदमों, विधिक सहायता और व्यक्तिगत समस्याओं के संबंध में जानकारी ली गई। मुलाकाती क्षेत्र में परिजनों की सहायता के लिए संचालित लीगल एड हेल्प डेस्क का भी निरीक्षण किया गया।

हिंदी दिवस पर बंदियों को बताए लोक अदालत के फायदे

निरीक्षण के बाद जिला कारागार परिसर में हिंदी दिवस एवं लोक अदालत के लाभ विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। असिस्टेंट प्रथम एलएडीसी अभिषेक पाठक ने हिंदी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को केंद्र सरकार की राजभाषा के रूप में स्वीकार करने का निर्णय लिया था।

शिविर में बंदियों को लोक अदालत के माध्यम से मामलों के निस्तारण, विधिक सहायता प्राप्त करने तथा अपने कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।

इस अवसर पर जेल अधीक्षक प्रशान्त मौर्या, कारापाल प्रदीप कुमार, उपकारापाल अमर सिंह एवं सुखवती तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के लिपिक शुभम् शुक्ला सहित जेल प्रशासन के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

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