बाढ़ एवं अतिवृष्टि के बाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ दल का चित्रकूट भ्रमण
बाढ़ एवं अतिवृष्टि के बाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ दल का चित्रकूट भ्रमण
बाढ़ एवं अतिवृष्टि के बाद पशुधन स्वास्थ्य परीक्षण हेतु बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ दल का चित्रकूट भ्रमण
सुरेन्द्र धुरिया अज़रा न्यूज बांदा–चित्रकूट जिले में पिछले कई दिनों से हुई अतिवृष्टि के कारण अनेक ग्रामों में बाढ़ एवं जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। ऐसी परिस्थितियों में पशुधन में संक्रामक, परजीवी एवं वेक्टर जनित रोगों के प्रसार की संभावना को दृष्टिगत रखते हुए पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण एवं रोग स्थिति के आकलन के लिए बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बांदा के माननीय कुलपति महोदय के निर्देशानुसार पशु स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विशेषज्ञों का तीन सदस्यीय दल चित्रकूट भेजा गया। विशेषज्ञ दल में कॉलेज ऑफ वेटरिनरी एंड एनिमल साइंसेज के डॉ. दीपेश भारत मिश्रा, पशु पोषण विशेषज्ञ; डॉ. अंकुर सिंह, पशु रोग विशेषज्ञ; तथा डॉ. प्रफुल्ल सिंह, पशु शल्य चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल रहे। विशेषज्ञ दल द्वारा दीन दयाल शोध संस्थान, कृषि विज्ञान केन्द्र, चित्रकूट के साथ मिलकर तीन दिनों तक चित्रकूट जिले के विभिन्न बाढ़ एवं अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर पशुओं के स्वास्थ्य की जांच की गई तथा संभावित संक्रामक रोगों के लक्षणों का परीक्षण किया गया। इस दौरान आवश्यकतानुसार पशु चिकित्सा उपचार एवं परामर्श प्रदान करने के साथ-साथ पशुपालकों को रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण के संबंध में वैज्ञानिक एवं तकनीकी जानकारी भी दी गई।
क्षेत्रीय भ्रमण एवं पशु स्वास्थ्य शिविर का प्रमुख उद्देश्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करना तथा बाढ़ के पश्चात उत्पन्न होने वाले संभावित संक्रामक, परजीवी एवं वेक्टर जनित रोगों का सर्वेक्षण करना रहा। भ्रमण के दौरान प्रभावित पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक पशु चिकित्सा उपचार एवं परामर्श उपलब्ध कराया गया। साथ ही, पशुपालकों को पशु स्वास्थ्य, स्वच्छता, जैव-सुरक्षा एवं रोग नियंत्रण के संबंध में वैज्ञानिक जानकारी प्रदान की गई तथा बाढ़ के पश्चात पशुओं के उचित पोषण, संतुलित आहार एवं समुचित प्रबंधन के संबंध में तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया। स्वस्थ पशुओं में समयबद्ध टीकाकरण के महत्व के प्रति पशुपालकों को जागरूक करते हुए संक्रामक रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण में सहयोग प्रदान करना भी इस भ्रमण का प्रमुख उद्देश्य रहा।
क्षेत्रीय भ्रमण, पशु स्वास्थ्य शिविर एवं कृषक गोष्ठियों के दौरान किए गए प्रत्यक्ष निरीक्षण एवं पशु स्वास्थ्य परीक्षण के आधार पर यह पाया गया कि बाढ़ एवं जलभराव के कारण पशुओं के आसपास मच्छर, मक्खी एवं अन्य वाहकों की संख्या में वृद्धि हुई, जिससे वेक्टर जनित एवं परजीवी रोगों के प्रसार का जोखिम बढ़ गया। कुछ पशुओं में लम्पी स्किन डिजीज के लक्षण पाए गए। प्रभावित पशुओं की पहचान कर उनका पशु चिकित्सा परीक्षण किया गया तथा आवश्यकतानुसार उपचार एवं चिकित्सकीय परामर्श प्रदान किया गया। बाढ़ एवं जलभराव की परिस्थितियों में गलघोंटू, लंगड़ी रोग, लेप्टोस्पायरोसिस तथा अन्य संक्रामक, जलजनित एवं वेक्टर जनित रोगों के उत्पन्न होने अथवा प्रसार की संभावना बढ़ सकती है। अतः प्रभावित क्षेत्रों में सतत रोग निगरानी एवं समयबद्ध रोकथामात्मक उपायों की आवश्यकता पाई गई। दूषित जल एवं अस्वच्छ परिस्थितियों के कारण पशुओं में पाचन तंत्र संबंधी संक्रमण, दस्त, जठरांत्रीय विकार एवं अन्य जलजनित स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम भी पाया गया। इस संबंध में पशुओं को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।
रोग के प्रभावी नियंत्रण एवं रोकथाम हेतु प्रभावित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से पृथक रखने की सलाह दी गई। पशुशाला एवं उसके आसपास के परिसर में नियमित साफ-सफाई एवं स्वच्छता बनाए रखने तथा आवश्यक जैव-सुरक्षा उपायों को अपनाने के लिए पशुपालकों को निर्देशित किया गया। मच्छर, मक्खी एवं अन्य वाहकों के प्रभावी नियंत्रण हेतु आवश्यक वेक्टर नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी गई। साथ ही, पशुपालकों को रोग के प्रमुख लक्षणों, संभावित प्रसार के माध्यमों तथा रोकथाम एवं नियंत्रण के उपायों के संबंध में जागरूक किया गया। स्वस्थ पशुओं में लम्पी स्किन डिजीज की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप आवश्यक टीकाकरण कराया गया। पशुपालकों को यह भी सलाह दी गई कि पशुओं में रोग के लक्षण अथवा किसी भी प्रकार की असामान्य स्वास्थ्य स्थिति दिखाई देने पर बिना विलंब के पशु चिकित्साधिकारी अथवा पशु चिकित्सा विशेषज्ञ से संपर्क करें।