चोटिल हो रहे आये दिन स्कूली बच्चे व राहगीर, बने जानलेवा गड्ढे
चोटिल हो रहे आये दिन स्कूली बच्चे व राहगीर, बने जानलेवा गड्ढे
जगह-जगह सड़क पर बने जानलेवा गड्ढे
– चोटिल हो रहे आये दिन स्कूली बच्चे व राहगीर
फोटो परिचय- जर्जर सड़क में जलभराव का दृश्य। एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज़ विजयीपुर, फतेहपुर। विकास खंड विजयीपुर क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्मित महावतपुर-असहट-पिपरहा डेरा महोलीडेरा जलंधरपुर.गुरवल, सिधरी बिकौरा, जगदीशपुर, मड़ौली, मझिगवां गढ़ीवा संपर्क मार्ग इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढे और उनमें भरा बारिश का पानी राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। हालात इतने खराब हैं कि इस मार्ग से गुजरने वाले स्कूली बच्चे, दोपहिया वाहन चालक, व्यापारी, किसान और दैनिक आवागमन करने वाले लोग हर दिन दुर्घटना के डर के साये में सफर करने को मजबूर हैं।
बारिश के कारण सड़क पर बने गड्ढे पानी से लबालब भर गए हैं, जिससे सड़क और गड्ढों में फर्क करना मुश्किल हो गया है। सबसे अधिक दिक्कत पिपराहा डेरा के पास लगभग 200 मीटर लंबे हिस्से में है, जहां जलभराव के कारण आए दिन स्कूली बच्चे फिसलकर गिर रहे हैं और चोटहिल हो रहे हैं। दोपहिया वाहन चालक भी संतुलन खोकर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। कई बार छोटे-बड़े हादसे होने के बावजूद जिम्मेदार विभाग समस्या के समाधान को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहा है। यह मार्ग क्षेत्र के दर्जनों गांवों की जीवनरेखा माना जाता है। इसी सड़क से छात्र-छात्राएं विद्यालय पहुंचते हैं, किसान अपनी उपज बाजार तक ले जाते हैं और व्यापारी तथा ग्रामीण रोजमर्रा के कार्यों के लिए आवागमन करते हैं। सड़क की जर्जर स्थिति के कारण लोगों का समय और धन दोनों बर्बाद हो रहे हैं, वहीं दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार लोक निर्माण विभाग और प्रशासन को सड़क की मरम्मत कराने की मांग की जा चुकी है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते सड़क पूरी तरह खस्ताहाल हो चुकी है और कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से तत्काल सड़क की मरम्मत कराने, गड्ढों को भरवाने तथा जलनिकासी की समुचित व्यवस्था कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया तो क्षेत्र के लोग आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।