फतेहपुर में फिर गूंज रही शास्त्री परिवार की सियासी विरासत
हरिकृष्ण शास्त्री की जीत से विभाकर के चुनावी सफर तक, अब चौथी पीढ़ी के विराज की समाजसेवा ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज फतेहपुर– देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के परिवार का फतेहपुर से करीब छह दशक पुराना राजनीतिक रिश्ता एक बार फिर चर्चा में है। शास्त्री परिवार की चौथी पीढ़ी के विराज शास्त्री पिछले कुछ समय से जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और युवाओं से जुड़े सामाजिक कार्यक्रमों के जरिए अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं। उनकी लगातार बढ़ती मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या शास्त्री परिवार एक बार फिर फतेहपुर की राजनीति में वापसी की तैयारी कर रहा है।
फतेहपुर की राजनीति में शास्त्री परिवार का अध्याय हरिकृष्ण शास्त्री से जुड़ता है। लाल बहादुर शास्त्री के ज्येष्ठ पुत्र हरिकृष्ण शास्त्री ने 1967 में इलाहाबाद से लोकसभा चुनाव जीता था। इसके बाद उन्होंने फतेहपुर को अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बनाया और 1980 तथा 1984 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में भी उन्होंने जिम्मेदारी संभाली। हालांकि 1989 में देश की राजनीति में आए बड़े बदलाव का असर फतेहपुर में भी दिखाई दिया। कांग्रेस विरोधी माहौल में जनता दल के नेता विश्वनाथ प्रताप सिंह ने फतेहपुर से चुनाव लड़ा और हरिकृष्ण शास्त्री को बड़े अंतर से पराजित किया। इसके बाद वी.पी. सिंह देश के प्रधानमंत्री बने और फतेहपुर लोकसभा सीट राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई। 1991 में कांग्रेस ने एक बार फिर हरिकृष्ण शास्त्री को मैदान में उतारा, लेकिन इस बार उन्हें बड़ा झटका लगा। वी.पी. सिंह ने फिर जीत दर्ज की, जबकि हरिकृष्ण शास्त्री करीब 26 हजार वोट पाकर चौथे स्थान पर रहे। 17 जून 1997 को हरिकृष्ण शास्त्री का निधन हो गया। हरिकृष्ण शास्त्री के बाद उनके पुत्र विभाकर शास्त्री ने फतेहपुर में परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। कांग्रेस ने उन्हें कई चुनावों में उम्मीदवार बनाया। 1998 के लोकसभा चुनाव में उन्हें 24,688 वोट मिले और वह चौथे स्थान पर रहे। 1999 में उनका वोट बढ़कर 94,032 हुआ, लेकिन जीत नहीं मिली। 2007 में उन्होंने फतेहपुर सदर से विधानसभा का चुनाव लड़ा और करीब 22,700 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। 2009 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने करीब 1.01 लाख वोट हासिल किए, लेकिन चौथे स्थान पर रहे। वर्ष 2024 में विभाकर शास्त्री ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।

